हल किया हुआ उदाहरण
नई व्यवस्था में टैक्स ₹87,050 है, जबकि पुरानी में ₹1,10,660 — टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए ₹23,610 कम। पुरानी व्यवस्था इसकी बराबरी तभी करेगी जब लगभग ₹1,13,500 की और छूट हो।
- साल की सैलरी
- ₹14,00,000
- चुकाने वाला टैक्स, पुरानी व्यवस्था
- ₹1,10,660
- चुकाने वाला टैक्स, नई व्यवस्था
- ₹87,050
| पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था | |
|---|---|---|
| छूट से पहले की कुल आय | ₹11,52,500 | ₹13,58,000 |
| डिडक्शन | ₹1,83,000 | ₹0 |
| टैक्स लगने वाली आय | ₹9,69,500 | ₹13,58,000 |
| स्लैब के हिसाब से टैक्स | ₹1,06,400 | ₹83,700 |
| रिबेट | ₹0 | ₹0 |
| सेस | ₹4,256 | ₹3,348 |
| चुकाने वाला टैक्स | ₹1,10,660 | ₹87,050 |
यह कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- आपकी आय (बीच में): आपकी उम्र, सैलरी स्लिप या Form 16 के हिसाब से सैलरी के हिस्से (सालाना), आपका कोई घर, ब्याज और दूसरी आय, और पहले से कटा टैक्स।
- पुरानी व्यवस्था (नीला): आपका किराया और जो छूट आप ले सकते हैं।
- नई व्यवस्था (नारंगी): कुछ भरना नहीं — इसमें बहुत कम छूट मिलती है।
- देखें कौन-सी व्यवस्था ज़्यादा बचाती है, फिर कंप्यूटेशन शीट। उसे प्रिंट करें या PDF बनाएँ।
FY 2025-26 (AY 2026-27) का रिटर्न भर रहे हैं?
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत FY 2025-26 के स्लैब, रिबेट, स्टैंडर्ड डिडक्शन और छूट की सीमाएँ वही हैं जो यहाँ इस्तेमाल हुई हैं, इसलिए टैक्स भी वही बनता है। दो बातें अलग हैं: धाराओं के नंबर, और HRA की 50% दर, जो FY 2025-26 में सिर्फ़ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में थी — बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या अहमदाबाद के लिए “दूसरा शहर” चुनें।
| क्या | FY 2025-26 (1961 अधिनियम) | 2026-27 से (2025 अधिनियम) |
|---|---|---|
| PPF, EPF, ELSS, बीमा, ट्यूशन फ़ीस… | 80C | धारा 123 |
| आपका अपना NPS (अतिरिक्त ₹50,000) | 80CCD(1B) | धारा 124(3) |
| कंपनी का NPS | 80CCD(2) | धारा 124 |
| हेल्थ इंश्योरेंस | 80D | धारा 126 |
| बचत खाते और डिपॉज़िट का ब्याज | 80TTA / 80TTB | धारा 153 |
| होम लोन का ब्याज | 24(b) | धारा 22 |
| रिबेट | 87A | धारा 156 |
| नई टैक्स व्यवस्था | 115BAC | धारा 202 |
इस्तेमाल हुई दरें
नई व्यवस्था (धारा 202): ₹4 लाख तक 0%; ₹4 लाख–₹8 लाख 5%; ₹8 लाख–₹12 लाख 10%; ₹12 लाख–₹16 लाख 15%; ₹16 लाख–₹20 लाख 20%; ₹20 लाख–₹24 लाख 25%; ₹24 लाख से ऊपर 30%। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000; कुल आय ₹12 लाख तक हो तो ₹60,000 तक रिबेट।
पुरानी व्यवस्था (वित्त अधिनियम, 2026, पहली अनुसूची, भाग I-B): ₹2.5 लाख तक शून्य (60–79 साल पर ₹3 लाख, 80+ पर ₹5 लाख), फिर 5%, ₹5 लाख से ऊपर 20% और ₹10 लाख से ऊपर 30%। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000; कुल आय ₹5 लाख तक हो तो ₹12,500 तक रिबेट।
दोनों में: ₹50 लाख से ऊपर 10%, ₹1 करोड़ से ऊपर 15% और ₹2 करोड़ से ऊपर 25% सरचार्ज (पुरानी व्यवस्था में ₹5 करोड़ से ऊपर 37%), मार्जिनल रिलीफ़ के साथ; फिर टैक्स और सरचार्ज पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस (वित्त अधिनियम, 2026, धारा 3)। कुल आय और टैक्स नज़दीकी ₹10 तक राउंड किए जाते हैं (धारा 516)।
स्रोत: वित्त अधिनियम, 2026 से संशोधित आयकर अधिनियम, 2025; वित्त अधिनियम, 2026 (धारा 3 और पहली अनुसूची); आयकर नियम, 2026 (नियम 279, HRA)। जाँचा गया: 8 अक्टूबर 2026।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹12.75 लाख की सैलरी सच में टैक्स-फ़्री है?
हाँ, नई व्यवस्था में। ₹12,75,000 की सैलरी में से ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने पर ₹12,00,000 की कुल आय बचती है; उस पर बना टैक्स ₹60,000 तक के रिबेट (धारा 156) से ख़त्म हो जाता है, इसलिए आप ₹0 भरते हैं। उससे थोड़ा ऊपर, मार्जिनल रिलीफ़ टैक्स को अचानक बढ़ने नहीं देता: ₹13,25,000 पर आप ₹52,000 भरते हैं, पूरा स्लैब टैक्स नहीं।
पुरानी या नई व्यवस्था — कौन-सी चुनें?
अपने आँकड़ों से देखें: नई व्यवस्था में दरें कम हैं, पुरानी में छूट ज़्यादा। इस पेज के उदाहरण में: नई व्यवस्था में टैक्स ₹87,050 है, जबकि पुरानी में ₹1,10,660 — टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए ₹23,610 कम। पुरानी व्यवस्था इसकी बराबरी तभी करेगी जब लगभग ₹1,13,500 की और छूट हो। अगर आपकी कोई बिज़नेस आय नहीं है, तो आप हर साल रिटर्न भरते समय नए सिरे से चुन सकते हैं (धारा 202(4)(b))।
HRA की छूट कैसे निकलती है?
इन तीनों में से जो सबसे कम हो: आपको मिलने वाला HRA; आपका किराया घटा बेसिक और DA का 10%; और मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु में बेसिक और DA का 50%, बाकी जगह 40% (अनुसूची III, क्रम 11 और आयकर नियम, 2026 का नियम 279)। उदाहरण में यह ₹2,28,000 बनता है। यह छूट सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में मिलती है।
धारा 80C, 80D और 87A कहाँ गईं?
आयकर अधिनियम, 2025 ने टैक्स वर्ष 2026-27 से इनके नंबर बदल दिए: 80C अब धारा 123 है (सूची अनुसूची XV में), 80CCD धारा 124, 80D धारा 126, 80TTA और 80TTB धारा 153, 87A का रिबेट धारा 156, नई व्यवस्था (115BAC) धारा 202, और होम लोन का ब्याज (24(b)) धारा 22। यहाँ इस्तेमाल हुई सीमाएँ नए अधिनियम की हैं।
शेयर और म्यूचुअल फ़ंड के कैपिटल गेन पर टैक्स कैसे लगता है?
12 महीने या कम रखे शेयर और इक्विटी फ़ंड: 20% (धारा 196)। ज़्यादा समय रखे: साल में ₹1,25,000 से ऊपर के मुनाफ़े पर 12.5% (धारा 198)। 24 महीने से ज़्यादा रखी दूसरी चीज़ें — सोना, प्रॉपर्टी, अनलिस्टेड शेयर — बिना इंडेक्सेशन 12.5% (धारा 197)। 1 अप्रैल 2023 से ख़रीदे डेट फ़ंड पर, चाहे जितने समय रखें, आपके स्लैब से टैक्स (धारा 76)। ₹9,00,000 की दूसरी आय के साथ ₹2,25,000 के लंबी अवधि के इक्विटी मुनाफ़े पर नई व्यवस्था में ₹13,000 टैक्स बनता है।
क्या ₹12 लाख का रिबेट कैपिटल गेन पर भी लगता है?
नहीं। नई व्यवस्था में रिबेट सिर्फ़ स्लैब दर वाले टैक्स को ख़त्म कर सकता है (धारा 156(3)), इसलिए ख़ास दरों वाले मुनाफ़े का टैक्स भरना पड़ता है। ₹9,00,000 की दूसरी आय और ₹2,00,000 के छोटी अवधि के इक्विटी मुनाफ़े पर कुल आय ₹11,00,000 है — ₹12 लाख से कम — फिर भी टैक्स ₹41,600 है: स्लैब वाला टैक्स रिबेट में जाता है, मुनाफ़े पर 20% नहीं। बची हुई बेसिक छूट पहले मुनाफ़े के ख़िलाफ़ लगती है।
यह कैलकुलेटर क्या नहीं गिनता?
कैपिटल लॉस और आगे ले जाए गए नुकसान, 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन या मकान पर इंडेक्सेशन का विकल्प (धारा 197(3)), ₹50 लाख से ज़्यादा आय पर कैपिटल गेन का कोई ख़ास सरचार्ज (सामान्य सरचार्ज लगाया गया है), बिज़नेस या प्रोफ़ेशन की आय, कंपनी की कार जैसी सुविधाओं की कीमत, पुराने बकाया वेतन की राहत, खेती की आय और अनिवासी (NRI) की आय। यह एक घर गिनता है। अपने रहने वाले घर के होम लोन ब्याज की सीमा पुरानी व्यवस्था में ₹2,00,000 है। आख़िरी आँकड़े Form 16, Form 26AS/AIS से मिलाएँ, और शक हो तो टैक्स सलाहकार से पूछें।