सुकन्या समृद्धि के मुख्य नियम
- 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं; जन्म प्रमाणपत्र ज़रूरी है। हर बेटी का एक खाता, और एक परिवार में ज़्यादा से ज़्यादा दो बेटियों के खाते (जुड़वाँ या तीन बच्चों पर छूट)।
- हर वित्त वर्ष में कम से कम ₹250 और ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,50,000, ₹50 के गुणकों में, खाता खुलने से 15 साल तक।
- खाता खुलने के 21 साल बाद मैच्योर होता है, और रकम बेटी को मिलती है।
- बेटी 18 साल की हो जाए या दसवीं पास कर ले, तो पढ़ाई के लिए पिछले साल के बैलेंस का 50% तक निकाल सकते हैं।
- ब्याज और खाते से मिलने वाली हर रकम पूरी तरह टैक्स-फ़्री है।
शादी पर खाता बंद करने, जल्दी बंद करने और डिफ़ॉल्ट के पूरे नियम, सरकारी स्रोतों के साथ: सुकन्या समृद्धि के सारे नियम (अंग्रेज़ी में) →
मैच्योरिटी रकम कैसे निकलती है
ब्याज साल में एक बार जुड़ता है। 15 साल तक पैसा जमा होता है; उसके बाद बैलेंस साल 21 तक बढ़ता रहता है:
साल के अंत का बैलेंस = (पिछले साल का बैलेंस + इस साल की जमा) × (1 + दर)
उदाहरण:₹1,50,000 हर साल, 8.2% पर 15 साल (कुल ₹22,50,000) बढ़कर 21 साल बाद ₹71,82,119 हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुकन्या समृद्धि पर अभी ब्याज दर कितनी है?
अक्टूबर–दिसंबर 2026 के लिए 8.2% सालाना। सरकार हर तिमाही दर तय करती है।
कितने साल पैसा जमा करना होता है?
खाता खुलने से 15 साल तक। उसके बाद बिना जमा किए भी खाते पर ब्याज मिलता रहता है, जब तक खाता खुलने के 21 साल बाद मैच्योर न हो जाए। नीचे के उदाहरण में 15 साल बाद बैलेंस ₹44,75,989 है, और आख़िरी 6 साल का ब्याज ही इसे ₹71,82,119 तक ले जाता है।
किसी साल पैसा जमा न कर पाएँ तो?
खाता "डिफ़ॉल्ट" में चला जाता है। खाता खुलने के 15 साल के अंदर हर छूटे साल के लिए ₹250 और ₹50 पेनल्टी भरकर इसे ठीक कर सकते हैं। ठीक न भी करें, तो खाते में जमा पैसे पर योजना की दर से ब्याज मिलता रहता है।
क्या सुकन्या समृद्धि टैक्स-फ़्री है?
हाँ। ब्याज और खाते से मिलने वाली हर रकम दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में टैक्स-फ़्री है। जमा रकम पर आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 (पुरानी धारा 80C) में छूट पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने पर मिलती है।